कांग्रेस के हमले में झुकते हुए फेसबुक ने कुछ ही घंटों में मीरा कुमार के फेसबुक पेज को अनब्लॉक कर दिया. मीरा कुमार न सिर्फ कांग्रेस की बड़ी नेता हैं बल्कि देश की संसदीय राजनीति में उनका अहम स्थान है. मीरा कुमार लोकसभा की पहली महिला स्पीकर रही हैं.

हाल में सियासत की सुर्खियों से दूर रहने वाली मीरा कुमार गुरुवार को अचानक चर्चा में आ गईं. हुआ यूं कि बिहार चुनाव के लिए प्रचार के घमासान के बीच फेसबुक ने मीरा कुमार का फेसबुक पेज ब्लॉक कर दिया.

मीरा कुमार ने इस घटनाक्रम की जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट से दी और कहा कि ये लोकतंत्र पर आघात है और ये महज संयोग नहीं हो सकता कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले फेसबुक मेरे पेज को ब्लॉक करता है.

इससे पहले भी नरेंद्र मोदी सरकार का पक्ष लेने के लिए कांग्रेस का हमला झेल चुके फेसबुक के इस कदम से देश का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया. कांग्रेस के नेता-प्रवक्ताओं ने फेसबुक और उसके बहाने नरेंद्र मोदी सरकार की तीखी आलोचना की.

कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने कहा कि फेसबुक इंडिया के नेतृत्व ने मोदी सरकार के एजेंडे के अधीन कैसे समझौता किया था, हमने देखा था. अब पूर्व स्पीकर और कांग्रेस के एक प्रमुख नेता के अकाउंट को ब्लॉक करने से साबित होता है कि विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने के लिए घटिया रणनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है.

कांग्रेस के हमले में झुकते हुए फेसबुक ने कुछ ही घंटों में मीरा कुमार के फेसबुक पेज को अनब्लॉक कर दिया. मीरा कुमार न सिर्फ कांग्रेस की बड़ी नेता हैं बल्कि देश की संसदीय राजनीति में उनका अहम स्थान है. मीरा कुमार लोकसभा की पहली महिला स्पीकर रही हैं. साल 2009 से 14 के बीच लोकसभा में अपने सरल व्यवहार और विपक्ष को साथ लेकर चलने की अनूठी कला से उन्होंने सभी का दिल जीत लिया.

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देश के जाने-माने दलित नेता जगजीवन राम और उनकी पत्नी इंद्राणी देवी की बेटी मीरा का जन्म 31 मार्च 1945 को पटना में हुआ. मीरा ने अपनी स्कूली पढ़ाई वेलहम गर्ल्स स्कूल, देहरादून और महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल, जयपुर से पूरी की. इसके बाद वे दिल्ली आईं और आईपी और मिरांडा कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन और पीजी तक पढ़ाई कीं. मीरा ने इंग्लिश में MA के बाद LLB की पढ़ाई की है.

1973 में मीरा कुमार ने सिविल सर्विस परीक्षा पास कीं और इंडियन फॉरेन सर्विस में अफसर बनीं. बतौर डिप्लोमैट अपने करियर में उन्होंने कई देशों में अपनी सेवाएं दी.

राजीव गांधी के न्यौते पर मीरा कुमार नौकरी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुईं. 1985 के एक उपचुनाव में वे यूपी की बिजनौर सीट से चुनाव लड़ीं. इसमें उन्होंने रामविलास पासवान को हराया और लोकसभा में प्रवेश किया. इसके साथ ही उनकी छवि एक बड़े दलित नेता के रूप में बनने लगी.

साल 1990 में वे कांग्रेस पार्टी की कार्यकारिणी की सदस्य बनीं और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की महासचिव भी चुनी गईं.

वे दूसरी बार सांसद बनीं वर्ष 1996 में और संसद में तीसरी पारी उन्होंने 1998 में शुरू की. वर्ष 2004 में बिहार के सासाराम से लोकसभा चुनाव जीतीं. यूपीए की इस सरकार में वे सामाजिक न्याय मंत्री बनीं. 2009 में वे फिर चुनाव जीतीं और देश की पहली महिला स्पीकर बनकर इतिहास कायम किया.

2017 के राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए ने उन्होंने अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया. हालांकि वे जीत नहीं सकीं. मीरा कुमार को कविताएं लिखना और पढ़ना पसंद हैं. उनकी पसंदीदा किताब महाकवि कालिदास की अभिज्ञान शाकुंतलम है.

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