कोरोना वायरस (Corona Virus) के प्रकोप से जूझ रही दुनिया अर्थव्यवस्था (Economy) को संभालने और भविष्य में ऐसे खतरों से बचने के लिए जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उसमें शहरों के ढांचे (City Infrastructure) में बदलाव का यह कदम बाज़ी मार रहा है.

Covid-19 से जब पूरी दुनिया में अ​र्थव्यवस्था को करारा झटका (Economic Slowdown) लगा, तब यह सोचा गया कि इससे उबरने के लिए क्या किया जाए. अमेरिका (US) और यूरोप (Europe) के कई बड़े शहरों ने इस दिशा में ’15 मिनट सिटी’ के कॉंसेप्ट को उम्मीद की किरण माना. एक तरफ बड़े अमेरिकी शहरों (US Cities) ने इस कॉंसेप्ट पर काफी बातचीत की, तो वहीं पेरिस ने रेस में बाज़ी मारते हुए घोषित कर दिया कि वह इस दिशा में कदम भी बढ़ाएगा.

अपनी खूबसूरत गलियों और जगह जगह स्मारकों (Eiffel Tower) के लिए मशहूर शहर पेरिस अब 15 मिनट सिटी बनने जा रहा है. इस बात को समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि यह क्या कॉंसेप्ट है. इसका सरल सा अर्थ यही है कि शहर को इस​ तरह विकसित किया जाएगा कि शहरियों की ज़रूरत की ज़्यादा से ज़्यादा चीज़ें महज़ 15 मिनट की पैदल या साइकिल दूरी पर मिल जाएं. लेकिन इस सरल मतलब के पीछे योजना बहुत विस्तृत है.

पेरिस कैसे बनेगा 15 मिनट सिटी?
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए CO2 उत्सर्जन को कम करने के नज़रिये से कोशिश है कि कारों और अन्य मोटर वाहनों का इस्तेमाल कम से कम हो. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेरिस की मेयर एन हिडाल्गो ने कहा कि साल 2024 तक पैरिस की हर गली, हर सड़क पर अनिवार्य तौर पर साइकिल व पैदल चलने के लिए अलग लेन होगी.

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यही नहीं, एन के मुताबिक शहर से 60,000 सड़कों पर बने पार्किेंग लॉट हटा दिए जाएंगे और उनकी जगह हरियाली या बच्चों के ​खेलने के लिए मैदान व पार्क की व्यवस्था होगी. इससे पहले, पेरिस में केवल रविवार को कार चलाने पर मनाही जैसे कदम उठाए जा चुके थे. योजना बताते हुए ये भी कहा गया कि पेरिस में एक ऐसी साइकल लेन भी बनाई जाएगी, जो करीब 50 किलोमीटर लंबी होगी.

और किस तरह बदलेगा शहर?
15 मिनट सिटी का मकसद यही होगा कि अस्पताल, स्कूल, रेस्तरां, दफ्तर और शॉपिंग जैसी कई बेसिक ज़रूरतें कम से कम दूरी के दायरे में पूरी हो सकें और लोग ज़्यादा सफर न करें. इसके लिए बिल्डिंगों को मल्टी यूटिलिटी बनाने की योजना है. मसलन वीकेंड पर अलग काम के लिए उसी बिल्डिंग का इस्तेमाल हो सके, ​जो हफ्ते भर दफ्तर या किसी और काम के लिए इस्तेमाल होती है.इस योजना में लोकल को बढ़ावा देने और स्थानीय पर गर्व करने की भावना शामिल है. तकरीबन 4 लाख कोरोना पॉज़िटिव केसों और करीब 31 हज़ार मौतों से जूझ चुके फ्रांस ने अपनी राजधानी को 15 मिनट सिटी बनाने की योजना अर्थव्यवस्था को उबारने के लिहाज़ से भी तैयार की है. पेरिस अलबत्ता ये कदम उठाने वाले शुरूआती शहरों में तो है, लेकिन पहला नहीं है.

और कौन से शहर होंगे 15 मिनट सिटी?
जी हां, इस कॉंसेप्ट पर अमल करने वाला पहला शहर पेरिस नहीं है. इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख शहर मेलबर्न खुद को 20 मिनट सिटी के तौर पर उभरने की योजना बना चुका है और इटली की फैशन कैपिटल मिलान भी 15 मिनट सिटी की योजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर चुका है. दुनिया के कई देश इस कॉंसेप्ट को न केवल सहमति दे चुके हैं, बल्कि इससे जुड़ चुके हैं.

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क्या भारत के शहर भी अपनाएंगे ये कॉंसेप्ट?
बेशक. क्षेत्रीयकरण, साझा विकास और फ्लेक्सिबल इस्तेमाल वाली इमारतों व स्थानों के इस कॉंसेप्ट को अपनाने के लिए भारत के पांच शहर सहमति दे चुके हैं. इन शहरों में दिल्ली, जयपुर, चेन्नई, बेंगलूरु और कोलकाता शामिल हैं, जो इस तरह से इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के बारे में आगे बढ़ेंगे कि तमाम नागरिकों को 15 मिनट की दूरी में ही एक पूरा और समृद्ध परिवेश मिल सके.

क्या और कौन से हैं C40 शहर?
15 मिनट सिटी के विचार पर हामी भरने वाले दुनिया के 96 शहरों को C40 शहरों के नाम से जाना जा रहा है. इन शहरों में दुनिया की एक चौथाई अर्थव्यवस्था और 70 करोड़ की आबादी बसती है. इन शहरों में प्रमुख तौर पर हॉंगकॉंग, लिस्बन, मेडेलिन, मॉंट्रियाल, न्यू ऑर्लीन्स, रॉटेरडम, लॉस एंजिल्स, सिएटल और सिओल जैसे शहर शामिल हैं. ज़ाहिर है भारतीय शहरों समेत पेरिस, मेलबर्न और मिलान के साथ ही अन्य कई शहर भी इस समूह में हैं, जो रोज़गार, व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों को निवास के आसपास ही सुनिश्चित करने के कॉंसेप्ट को अपनाने जा रहे हैं.

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