अभी सरसों के किसान के लिए अच्छी खबर आ रही है. सरसों के किसानों को फसल का अच्छा भाव मिल रहा है और अभी एमएसपी से भी काफी ज्यादा दाम मिल रहा है. साथ ही इस साल सरसों की पैदावार पिछले साल के मुकाबले कई गुना तक बढ़ सकती है.

अभी सरसों के किसान के लिए अच्छी खबर आ रही है. सरसों के किसानों को फसल का अच्छा भाव मिल रहा है और अभी एमएसपी से भी काफी ज्यादा दाम मिल रहा है. साथ ही इस साल सरसों की पैदावार पिछले साल के मुकाबले कई गुना तक बढ़ सकती है. अधिक उपज होने की स्थिति में इससे सरसों के भाव पर भी असर पड़ सकता है. बता दें कि मंडियों में इसका औसत रेट 5500 रुपये क्विंटल का चल रहा है, जबकि एमएसपी 4650 रुपये है.

ऐसे में जानते हैं कि इस बार पैदावार में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है और सरसों के भाव कितने रह सकते हैं. जानते हैं सरसों से जुड़ी कई खास बातें…

कितनी होगी इस बार फसल?

कृषि मंत्रालय की जानकारी के अनुसार इस बार सरसों की पैदावार पहले से ज्यादा हो सकती है. माना जा रहा है कि 2019-20 में सरसों की उपज 91.2 लाख टन हुई थी, जो 2020-21 में बढ़कर 104.3 लाख टन होने की संभावना है. बताया जा रहा है अभी तक कभी भी देश में इतनी सरसों की पैदावार नहीं हुई है. डीडी न्यूज के अनुसार, इस बार सरसों की पैदावार में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. इस कारण किसान सरकारी मंडियों में न बेचकर सीधे व्यापारियों को बेच रहे हैं. किसानों को बढ़े हुए दाम का फायदा मिल रहा है.

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क्या है सरसों के भाव?

डीडी न्यूज के अनुसार, उत्तर प्रदेश की आगरा मंडी के अनुसार, 31 मार्च को भाव 5150 रहा जबकि 1 अप्रैल को 4950 रुपये प्रति क्विंटल रहा है. यानी एक दिन में करीब 200 रुपये की कमी आई. वहीं, राज्य की एटा मंडी में 31 मार्च को 4920 रुपये और 1 अप्रैल को भाव 4950 रुपये प्रति क्विंटल था. वहीं, मथुरा की मंडी में 31 मार्च को भाव 5050 रुपये प्रति क्विंटल था और 1 अप्रैल को 5100 रुपये प्रति क्विंटल था. इसके अलावा इटावा में सरसों के भाव 5050 रुपये, लखनऊ में 4900, हाथरस में 4900 रुपये रहे.

कहां होती है सबसे ज्यादा सरसों की खेती?

सरसों की खेती मुख्य रूप से हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में की जाती है. लेकिन खाद्य तेल के रूप में इसका देशभर में उपयोग किया जाता है. सरसों के तेल में पाए जाने वाले औषधीय गुण के कारण इसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है. औषधीय गुण के कारण ही सरकार ने सरसों के तेल में अन्य खाद्य तेल मिलाने पर रोक लगा दी है. इसका सीधा फायदा किसानों को होता है.

जैविक खेती से ज्यादा मुनाफा

जैविक खेती मौजूदा समय की मांग है. जैवीक खेती के चलते किसानों की लागत कम हो रही है, जिससे मुनाफा बढ़ रहा है. इसके साथ ही पर्यावरण और मिट्टी को भी लाभ पहुंचता है. अगर आप भी पारंपरिक तरीके से सरसों की खेती करते हैं तो एक बार जैविक तरीका अपनाकर देख सकते हैं. इस विधि से आपका मुनाफा भी बढ़ेगा और आपके खेत की मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी बढ़ेगी.

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