महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari ) ने मुख्यमंत्री को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें वे चाहते हैं कि राजभवन को खुद फैसले लेने की आज़ादी हो.

मुंबई. ऐसा लग रहा है कि महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari ) और वहां के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Chief Minister Uddhav Thackeray) के बीच खींचतान शुरू हो गई है. दरअसल, राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें वे चाहते हैं कि राजभवन को खुद फैसले लेने की आज़ादी हो. राज्यपाल ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को मुख्यमंत्री के ऑफिस से अलग करने की मांग की है.

राजभवन मांगे कामकाज में आज़ादी
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने चिट्ठी में लिखा है कि राजभवन को न्यायपालिका और लेजिस्लेटिव सेक्रेटेरिएट की तरह स्वतंत्र बनाया बनाया जाए. सीधे शब्दों में कहे तो राज्यपाल चाहते हैं कि राजभवन में काम करने वाले लोगों की नियुक्ति और ट्रांसफर का अधिकार उनके पास हो. फिलहाल राजभवन का ये सारा काम GAD की तरफ से किया जाता है.

ठाकरे की तरफ से जवाब का इंतज़ार

सूत्रों के मुताबिक उद्धव ठाकरे की सरकार ऐसा नहीं करने वाली है. दरअसल ये नियमों के खिलाफ है. सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो फिर राज्यपाल अपने हिसाब से राजभवन में स्टाफ की नियुक्ति करेंगे, जिससे कामकाज में दिक्कतें आएंगी. दरअसल, राजभवन के सीनियर स्टाफ मुख्यमंत्री के ऑफिस से कॉर्डिनेट करते हैं. राज्यपाल ने ये चिट्ठी मार्च में लिखी थी. लेकिन अभी तक ठाकरे की ऑफिस से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है.

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फिलहाल ऐसे होती है नियुक्ति
इस वक्त राजभवन को जब भी किसी स्टाफ की जरूरत होती है तो GAD की तरफ से एलिजिबल कैंडिडेट की एक लिस्ट दी जाती है. इसी आधार पर राजभवन की तरफ से नियुक्ति होती है. राजभवन का कहना है कि इस प्रक्रिया में काफी देरी होती है. यहां करीब 200 लोग काम करते हैं. यहां सीनियर अधिकारियों के अलावा आईएएस, आईपीएस और कई जूनियर लेवल के स्टाफ होते हैं. हर छोटी-छोटी चीजों के लिए फाइल को GDA के पास भेजना होता है. जिससे काफी दिक्कतें आती है.

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