नेपाल ने शनिवार को एक बयान में भरोसा जताया कि उसके दोनों ‘मित्रवत पड़ोसी’ भारत और चीन (India-China) क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता (Peace And Stablitiy) को ध्यान में रखते हुए शांति माध्यमों से अपने आपसी मतभेदों को सुलझा लेंगे.

काठमांडू. नेपाल ने शनिवार को एक बयान में भरोसा जताया कि उसके दोनों ‘मित्रवत पड़ोसी (friendly neighbours)’ भारत और चीन (India-China) क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता (Peace And Stablitiy) को ध्यान में रखते हुए शांति माध्यमों से अपने आपसी मतभेदों को सुलझा लेंगे. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में गालवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से हल किया जाना चाहिए.

दो ताकतवर एशियाई देशों के मध्य में स्थित इस हिमालयी देश ने अपने बयान में कहा कि ‘वो हमेशा क्षेत्रीय और विश्व शांति के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा और इसके साथ ही यह विश्वास भी व्यक्त किया कि भारत और चीन के बीच मतभेद ‘अच्छे पड़ोसी की भावना’ के साथ हल हो जाएंगे.

गालवान घाटी में दोनों देशों की सेना के बीच हुई झड़प

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि दोनों देशों के बीच विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए. नेपाल सरकार ने एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से देश के राजनीतिक नक्शे को फिर से परिभाषित करने की प्रक्रिया पूरी की. रणनीतिक रूप से तीन भारतीय क्षेत्रों लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को इस मानचित्र में शामिल कर लिया जो नई दिल्ली के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों को एक बड़ा झटका दे सकता है.

READ:  Delhi Election Result: ‘फिर एकबार केजरीवाल’.. एक्झिट पोलचे अंदाज खरे ठरतायत?

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि नेपाल हमेशा क्षेत्रीय और विश्व शांति के लिए मजबूती से खड़ा है. नेपाल का यह बयान लद्दाख की गालवान घाटी में दो देशों की सेनाओं के बीच हुई झड़पों के बाद आया है. गौरतलब है कि पांच दशक में पहली बार भारत-चीन के बीच सीमा विवाद में खूनी झड़प हुई जिसमें भारतीय सेना के एक कर्नल समेत 20 जवान शहीद हो गए थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here