24 अप्रैल 2013 को इस हादसे के दिन सुबह के समय इमारत की बिजली गुल हो गई. इसके बाद इमारत की ऊपरी मंजिल पर रखे जनरेटर को चालू किया गया. वहीं, सुबह करीब 8.57 बजे इमारत भरभराकर गिर पड़ी.

बांग्लादेश (Bangladesh) में बड़ी संख्या में गार्मेंट फैक्ट्रियां लगाई गई हैं, जहां हजारों की संख्या मे लोग काम करते हैं. लेकिन जिन इमारतों में इन कंपनियों को लगाया गया है, वहां की जरजर हालत हादसों को दावत देने का काम करती है. ऐसा ही एक हादसा आज ही के दिन आठ साल पहले राजधानी ढाका (Dhaka) की एक आठ मंजिला इमारत में हुआ. इस हादसे में 1134 लोगों की मौत हो गई, जबकि 2500 से ज्यादा लोग घायल हो गए. इसे आधुनिक मानव इतिहास में सबसे घातक स्ट्रक्चरल विफलता और इतिहास में सबसे घातक गार्मेंट-फैक्ट्री आपदा माना जाता है.

ढाका में स्थित ये आठ मंजिला इमारत जरजर हालत की वजह से ढह गई. हादसे के समय इसमें एक कपड़े की फैक्ट्री, एक बैंक, अपार्टमेंट और कुछ दुकानों मौजूद थीं. इमारत के भीतर दरार दिखते ही निचली मंजिल पर मौजूद बैंक और दुकानों को तुरंत बंद कर दिया गया. वहीं, इन दरारों की जानकारी इमारत के मालिक को दी गई, जिसने इसे नजरअंदाज कर दिया. दरार के बावजूद इमारत में फैक्ट्री चालू रही. गार्मेंट फैक्ट्री में काम करने वाले कामगारों को कहा गया कि वे काम पर लौट आएं. अगले दिन मजदूर काम करने के लिए फैक्ट्री पहुंचे और इमारत भरभराकर गिर पड़ी.

हादसे के समय इमारत में मौजूद थे तीन हजार से ज्यादा कर्मचारी

24 अप्रैल 2013 को इस हादसे के दिन सुबह के समय इमारत की बिजली गुल हो गई. इसके बाद इमारत की ऊपरी मंजिल पर रखे जनरेटर को चालू किया गया. वहीं, सुबह करीब 8.57 बजे इमारत भरभराकर गिर पड़ी. इस दौरान सिर्फ ग्राउंड फ्लोर की बचा हुआ था. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पुष्टि की कि इमारत के गिरने के समय 3,122 कर्मचारी इसमें मौजूद थे. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि इमारत के गिरते ही ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो. इमारत जमींदोज हो चुकी थी और सैकड़ों की संख्या में लोग इसमें फंस चुके थे.

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संयुक्त राष्ट्र की मदद को सरकार ने ठुकराया

हादसे की जानकारी मिलते ही बांग्लादेश की राहत एवं बचाव टीम मौके पर पहुंची. वहीं, हादसे की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश सरकार को मदद देने का प्रस्ताव दिया, जिसे ठुकरा दिया गया. सरकार का कहना था कि उसका बचाव दल सभी सामानों से सुसज्जित है और वह इस कार्य को करने में सक्षम है. हालांकि, बांग्लादेशी राहत एवं बचाव टीम ने अपर्याप्त उपकरणों के जरिए बचाव कार्य को शुरू किया. दूसरी ओर, मलबे के नीचे फंसे लोग बढ़ते तापमान से परेशान हो रहे थे और उन्होंने जिंदा बचे रहने के लिए अपना पेशाब तक पीया. फंसे हुए लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें जल्द ही बचा लिया जाएगा.

मरने वालों में शामिल थीं अधिकतर महिलाएं

इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए 17 दिनों तक राहत कार्य चलता रहा. बचाव कार्य समाप्त होने पर पता चला कि कुल 1134 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2500 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हो गए थे. मरने वालों में अधिकतर महिलाएं शामिल थीं. इसके अलावा उनके साथ उनके बच्चे भी इस हादसे का शिकार हो गए, जो इमारत की नर्सरी में काम के दौरान रहा करते थे. इमारत के गिरने को लेकर बांग्लादेशी सरकार की दुनियाभर में आलोचना की गई. साथ ही पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि अगर संयुक्त राष्ट्र की मदद को लिया गया होता तो अधिक संख्या में लोगों की जान बचाई गई होती.

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