यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंडीज सिस्मिक रिसर्च सेंटर के प्रमुख वैज्ञानिक रिचर्ड रॉबर्टसन ने कहा कि ज्वालामुखी में विस्फोट की घटना कुछ समय और चलती रह सकती है

Volcano eruption in Saint Vincent: सेंट विंसेंट में पूर्वी कैरेबियाई द्वीप पर ला सॉफरियर ज्वालामुखी में लगातार तीसरे दिन विस्फोट की तेज आवाजें आ रही हैं. ज्वालामुखी से निकली राख से पूरा क्षेत्र राख की चादर में लिपट गया है. इस वजह से कई मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. विस्फोट के न थमने की वजह से डरे हुए लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं.

क्षेत्र के निवासियों ने सुबह कई बार बिजली जाने की सूचना दी. हालांकि अधिकारियों ने दोपहर बाद तक कई जगहों पर बिजली बहाल कर दी. ला सॉफरियर ज्वालामुखी से लावा फूटने की घटना के बाद शुक्रवार को कई लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर चले गए और शेष बचे लोगों ने रविवार को किसी सुरक्षित स्थान पर शरण ली. ज्वालामुखी से गर्जन की आवाज करीब 32 किलोमीटर दक्षिण किंग्सटाउन की राजधानी में भी सुनी गई. (Volcano eruption in St. Vincent)

अभी जारी रह सकते हैं विस्फोट

यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंडीज सिस्मिक रिसर्च सेंटर के प्रमुख वैज्ञानिक रिचर्ड रॉबर्टसन ने कहा कि ज्वालामुखी में विस्फोट की घटना कुछ समय और चलती रह सकती है. रॉबर्टसन ने कहा, ‘कुछ समय बाद यह शांत हो जाएगा. उम्मीद है कि हमें कुछ वक्त मिलेगा जिसमें हम चीजों को थोड़ा सुधार सकें. हालांकि अगर ज्वालामुखी में फिर से विस्फोट होने लगे तो हैरानी नहीं होगी.’ रविवार सुबह अपना घर छोड़कर जा रहे एक किसान एलफोर्ड लेविस (56) ने बताया कि मौजूदा घटना 1979 में ज्वालामुखी विस्फोट से भी बड़ी है.

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मारे गए थे 1600 लोग

साल 1902 में ज्वालामुखी से 1,220 मीटर तक लावा फूटने से करीब 1,600 लोगों की मौत हुई थी. 32 द्वीपों से बने सेंट विंसेट एंड द ग्रेनेडाइंस देश के प्रधानमंत्री राल्फ गोंजाल्विस ने अपील की कि लोग शांति बनाए रखें और खुद को कोरोना वायरस से भी बचाएं. उन्होंने कहा कि अधिकारी ज्वालामुखी से निकली राख को हटाने का बेहतर तरीका अपना रहे हैं. करीब 3,200 लोगों ने 78 सरकारी शिविरों में शरण लिया है और पास के द्वीपों से लोगों को लाने के लिए चार खाली जहाजों को तैयार रखा गया है. 130 से अधिक लोगों को पहले ही सेंट लूसिया पहुंचा दिया गया है. शिविर में ठहरे लोगों की कोविड-19 की जांच की गई और जांच में पुष्टि होने पर उन्हें पृथक-वास भेजा जा रहा है. एंटीगुआ और ग्रेनेडा समेत पड़ोस के देशों ने भी लोगों को शरण देने की पेशकश की है.

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